PM मोदी का वीडियो हटाने पर Meta ने मांगी माफी, अधिकारी ने गलती के लिए किया खेद व्यक्त

न्यूज़ डेस्क,नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले में Meta ने आधिकारिक रूप से माफी मांग ली है। कंपनी के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने इसे तकनीकी चूक बताते हुए कहा कि इस घटना को गंभीरता से लिया गया है और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं।

जोएल कपलान ने बताया कि कंपनी की ओर से केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर इस तकनीकी त्रुटि के लिए खेद व्यक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि Meta अपनी गलती स्वीकार करता है और प्लेटफॉर्म की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो पर अस्थायी रोक लगाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद Meta के वैश्विक नेतृत्व ने पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से खेद व्यक्त करते हुए इसे एक तकनीकी गलती करार दिया।

दरअसल, सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने बुधवार को Meta के सीईओ मार्क जकरबर्ग से इस मामले में सार्वजनिक माफी की मांग की थी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र में लोकसभा सचिवालय के निदेशक ने कहा कि यदि तीन दिनों के भीतर माफी नहीं मांगी गई तो कंपनी को मिली कानूनी सुरक्षा और विशेष छूट पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी का Gen Z और छात्रों से जुड़ा वीडियो करीब 5 से 6 घंटे तक फेसबुक से हटना अत्यंत गंभीर मामला है। संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने बताया कि Meta के प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया है कि यह वीडियो रात 12:30 बजे से सुबह 5 बजे तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं था। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में माफी नहीं मांगने की स्थिति में कंपनी को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।

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गूगल इंडिया प्रमुख पर भी कार्रवाई की सिफारिश

संसदीय समिति ने Google India के प्रमुख के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है। आरोप है कि फर्जी निवेश ऐप्स के जरिए निवेशकों को 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। समिति ने केंद्र सरकार से इस मामले में भी उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

सरकार ने Meta से पूछे कड़े सवाल

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान Meta के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन में सामने आई कमियों को लेकर भी खेद व्यक्त किया।

बैठक में सरकारी अधिकारियों ने Meta से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कड़े सवाल पूछे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के शोषण से जुड़े कंटेंट के माध्यम से विज्ञापन से कमाई नहीं कर सकते और साथ ही ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा का दावा भी नहीं कर सकते।

सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन पर विस्तार से चर्चा हुई, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटाए जाने का विषय इसमें शामिल नहीं था।

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कंटेंट मॉडरेशन में कमियां स्वीकार कीं

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों और Meta के वैश्विक नेतृत्व के बीच दो दिवसीय बैठक में भारतीय कानूनों के पालन, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन पर विस्तृत चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार, Meta ने कंटेंट मॉडरेशन में हुई कमियों को स्वीकार किया और हानिकारक सामग्री से प्रभावी ढंग से निपटने में हुई चूक पर खेद जताया। कंपनी ने यह भी माना कि कुछ विशेष श्रेणी के कंटेंट को बढ़ावा (Boost) देने के लिए बड़ी राशि खर्च की गई थी, जिस पर भी उसने अफसोस जताया।

मामले में आगे की चर्चा के लिए Meta के अधिकारियों को गुरुवार को एक बार फिर बैठक के लिए बुलाया गया है। सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया कि Meta संभवतः इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत मध्यस्थों (Intermediaries) को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का पात्र नहीं हो सकता, क्योंकि उसके एल्गोरिदम सक्रिय रूप से यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस उपयोगकर्ता तक पहुंचाया जाएगा।

आमतौर पर आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए ‘सेफ हार्बर’ की कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है। हालांकि, अधिकारियों का तर्क है कि Meta केवल एक साधारण मध्यस्थ (Intermediary) नहीं है, क्योंकि उसके एल्गोरिदम स्वयं यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस उपयोगकर्ता को दिखाया जाएगा। इसी आधार पर अधिकारियों का मानना है कि Meta पर सेफ हार्बर सुरक्षा लागू नहीं होती।