हेल्थ डेस्क से प्रकाशित
सुबह का समय लगभग हर घर में एक जैसा होता है। कोई उठते ही चाय ढूंढता है, कोई मोबाइल देखता है और कोई जल्दी-जल्दी काम पर निकल जाता है। लेकिन इसी भागदौड़ में हम शरीर के कुछ छोटे-छोटे संकेतों को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
कभी सुबह उठते ही सिर भारी लगता है, कभी मुंह बहुत सूखा होता है, कभी शरीर में अजीब-सी थकान रहती है और कभी कुछ कदम चलने के बाद ही सांस तेज चलने लगती है। हर बार इसका मतलब बीमारी होना नहीं है, लेकिन अगर कोई परेशानी बार-बार हो रही है या लगातार बनी हुई है, तो उसे केवल थकान मानकर टालना ठीक नहीं।
सुबह की थकान को हमेशा नींद की कमी न समझें
अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त समय सोने के बावजूद रोज सुबह थका हुआ उठता है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। नींद की गुणवत्ता खराब होना, तनाव, अनियमित दिनचर्या, कुछ दवाओं का असर या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं इसकी वजह हो सकती हैं।
खासकर अगर थकान के साथ लगातार कमजोरी, वजन में बिना वजह बदलाव या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से बात करना बेहतर है।
बार-बार प्यास लगना और पेशाब आना भी ध्यान देने लायक है
गर्मी में ज्यादा प्यास लगना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर मौसम सामान्य होने के बावजूद लगातार बहुत ज्यादा प्यास लगती है और बार-बार पेशाब आता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ये लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं और केवल इनसे किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन लगातार बने रहने पर ब्लड ग्लूकोज की जांच और डॉक्टर की सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। डायबिटीज के शुरुआती लक्षण कई बार बहुत हल्के होते हैं। (World Health Organization)
सुबह सिरदर्द हो तो सिर्फ दर्द की गोली न लें
कभी-कभार सिरदर्द होना आम बात है। लेकिन अगर सुबह-सुबह सिरदर्द बार-बार होने लगे, तो उसके कारण को समझना जरूरी है।
उच्च रक्तचाप अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद रह सकता है। इसलिए केवल सिरदर्द देखकर BP की समस्या मान लेना सही नहीं है, लेकिन नियमित रूप से BP जांचना खासकर उम्र बढ़ने के साथ एक अच्छी स्वास्थ्य आदत है। WHO के मुताबिक हाई BP की पहचान के लिए रक्तचाप की सही तरीके से जांच जरूरी है। (World Health Organization)
सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलती है? शरीर की सुनिए
अगर पहले आप आसानी से सीढ़ियां चढ़ लेते थे, लेकिन अब थोड़ी मेहनत में ही असामान्य रूप से सांस फूलने लगी है, तो इसे उम्र या कमजोरी कहकर छोड़ देना सही नहीं।
इसके पीछे फिटनेस की कमी से लेकर एनीमिया, फेफड़ों या हृदय से जुड़ी समस्याओं तक कई कारण हो सकते हैं। खासकर अगर सांस फूलने के साथ सीने में दर्द, बेहोशी जैसा महसूस होना या अचानक गंभीर परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
सुबह का नाश्ता ही नहीं, पूरी दिनचर्या मायने रखती है
स्वास्थ्य सुधारने के लिए किसी एक “सुपरफूड” या घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय पूरी दिनचर्या पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
खाने में विविधता रखें और फल-सब्जियों, साबुत अनाज तथा कम-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। बहुत ज्यादा नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा वाले भोजन को सीमित करना भी जरूरी है। WHO के अनुसार स्वस्थ आहार की बुनियाद पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता पर आधारित होनी चाहिए। (World Health Organization)
व्यायाम के लिए जिम जाना जरूरी नहीं
स्वास्थ्य के लिए जरूरी शारीरिक गतिविधि का मतलब सिर्फ जिम जाना नहीं है। पैदल चलना, साइकिल चलाना, घर के काम करना, खेलना या रोजमर्रा में ज्यादा सक्रिय रहना भी शारीरिक गतिविधि का हिस्सा है।
WHO के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय रोग, स्ट्रोक, डायबिटीज और कई अन्य गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम को कम करने और मानसिक स्वास्थ्य व जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद करती है। (World Health Organization)
एक छोटी आदत बदल सकती है आपकी सेहत की तस्वीर
सबसे जरूरी बात यह है कि शरीर के संकेतों को लेकर न तो हर छोटी परेशानी से डरें और न ही हर चीज को नजरअंदाज करें।
बार-बार होने वाली समस्या को नोट करें। कब होती है, कितनी देर रहती है और उसके साथ कोई दूसरा लक्षण तो नहीं है—इन बातों पर ध्यान दें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर को यही जानकारी सही कारण तक पहुंचने में मदद कर सकती है।
और सबसे अहम बात—इंटरनेट पर पढ़कर खुद बीमारी तय न करें। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जागरूक करने के लिए है, डॉक्टर की जांच और सलाह का विकल्प नहीं।
क्योंकि कई बार शरीर बीमारी का नाम नहीं बताता, सिर्फ एक छोटा-सा संकेत देता है। जरूरत है उस संकेत को समय रहते समझने की।
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