प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरप्लस यानी अतिरिक्त शिक्षकों के पुनः समायोजन को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे शिक्षकों को उसी विकासखंड के उन विद्यालयों में समायोजित किया जाए, जहां शिक्षकों की संख्या कम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक विद्यालय में कम से कम दो शिक्षक उपलब्ध रहें।यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने सौरभ कुमार सिंह व छह अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।
पांच जिलों के अतिरिक्त शिक्षकों का पूरा विवरण कोर्ट में पेश
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव ने कोर्ट के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें अलीगढ़, कौशांबी, पीलीभीत, सिद्धार्थनगर और श्रावस्ती जिलों में अतिरिक्त शिक्षकों का पूरा विवरण दिया गया था।रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सूची में शामिल शिक्षकों की ओर से उनके पुनः समायोजन को लेकर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है।
कम शिक्षक वाले स्कूलों में किया जाएगा समायोजन
शिक्षकों की ओर से कोई आपत्ति नहीं आने के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को उन्हें उसी विकासखंड के भीतर ऐसे विद्यालयों में भेजने की अनुमति दे दी, जहां या तो कोई शिक्षक तैनात नहीं है या फिर केवल एक शिक्षक कार्यरत है।कोर्ट का उद्देश्य साफ है कि ऐसे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर की जा सके और प्रत्येक स्कूल में कम से कम दो शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
लखनऊ के शहरी क्षेत्र के स्कूलों की सूची भी होगी अपलोड

राज्य सरकार के अनुरोध पर कोर्ट ने लखनऊ शहरी क्षेत्र के स्कूलों से संबंधित सूची को भी अपलोड करने की अनुमति दे दी है।हालांकि, कोर्ट ने उन शिक्षकों के मामले में स्थिति अलग रखी है, जिन्होंने अपने समायोजन को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे शिक्षकों के पक्ष में पहले से जारी अंतरिम आदेश अपील के अंतिम निर्णय तक लागू रहेंगे।
11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले में अब अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को दोपहर दो बजे निर्धारित की गई है। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद पांच जिलों में अतिरिक्त शिक्षकों के पुनः समायोजन का रास्ता साफ हो गया है। इसका सीधा उद्देश्य उन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करना है, जहां वर्तमान में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
