जिला संवाददाता, कृपाशंकर पांडेय
सलखन(चोपन), सोनभद्र। इंडियन बैंक की सलखन शाखा में ग्राहक के खाते से प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा के नाम पर ₹436 काटे जाने और बीमा रसीद में शिकायतकर्ता के मृत पिता का नाम नॉमिनी दर्ज होने का गंभीर मामला सामने आया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उसने बीमा के लिए कोई सहमति नहीं दी थी और न ही फॉर्म भरा था।
प्रार्थी ने 15 जुलाई 2026 को मामले की लिखित शिकायत हेड ऑफिस और जोनल हेड से की, जिसके बाद 18 जुलाई को बीमा बंद कर ₹436 उसके खाते में वापस कर दिए गए।
हालांकि, राशि वापस होने के बावजूद प्रार्थी ने मामले की जांच की मांग जारी रखी है।
बिना सहमति बीमा कैसे हुआ, मृत पिता का नाम नॉमिनी क्यों?
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसे खाते से ₹436 कटने की जानकारी हुई तो शाखा में जाकर उसने बीमा संबंधी दस्तावेज देखने की मांग की।
उसका कहना है कि उसे कोई मूल आवेदन फॉर्म नहीं दिखाया गया, जबकि बीमा रसीद पर नॉमिनी के रूप में उसके मृत पिता का नाम दर्ज मिला।
शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया कि जब उसने बीमा कराया ही नहीं तो उसके नाम पर बीमा कैसे हुआ और उसके मृत पिता का नाम नॉमिनी के रूप में कैसे दर्ज हो गया।
वह यह भी आरोप लगाता है कि जब उसने फॉर्म दिखाने को कहा तो उसे नया फॉर्म भरने के लिए दिया गया ।
प्रार्थी को आशंका है कि यदि पहले से कोई वैध फॉर्म उपलब्ध होता, तो उसे दिखाया जाता और संभव है कि बाद में रिकॉर्ड के लिए नया फॉर्म तैयार कराया गया हो।
हालांकि इस आशंका की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और इसकी वास्तविकता दस्तावेजों की जांच से ही सामने आएगी।
12 अगस्त को अनाधिकृत व्यक्ति से शिकायत वापस लेने के लिए फोन कराने और ग्राहक की गोपनीय जानकारी साझा करने का दावा
प्रार्थी के अनुसार, 12 अगस्त 2026, बुधवार को उसे दो अलग-अलग नंबरों से फोन आया और कथित तौर पर कहा गया कि जब ₹436 वापस कर दिए गए हैं तो शिकायत वापस ले लो ।
प्रार्थी का दावा है कि अपने स्तर पर जानकारी करने पर पता चला कि इनमें से एक नंबर दीपक लाल, जो बैंक से जुड़े प्राइवेट कंपनी के बैंक मित्र के रूप में कार्य करता है ।
इसी को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि मामला बैंक की आधिकारिक शिकायत प्रक्रिया में है, तो बैंक से जुड़े किसी बाहरी व्यक्ति या बैंक मित्र को शिकायत की जानकारी कैसे मिली और वह शिकायतकर्ता से शिकायत वापस लेने के लिए क्यों संपर्क कर रहा था।
₹436 की राशि को लेकर नियम क्या कहते हैं?
₹436 की राशि महत्वपूर्ण है क्योंकि DFS की आधिकारिक जनसुरक्षा बीमा पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान वार्षिक प्रीमियम ₹436 है।
उसी आधिकारिक जानकारी में यह भी स्पष्ट है कि प्रीमियम खाते से लाभार्थी द्वारा दी गई सहमति के आधार पर ऑटो डेबिट किया जाता है और बैंक को संबंधित फॉर्म सुरक्षित रखना होता है।
Shriram Life की आधिकारिक वेबसाइट भी PMJJBY के ₹436 वार्षिक प्रीमियम की जानकारी देती है और किसी भी स्थिति में प्रीमियम को नॉन- रिफंडेबल बताती है, हालांकि उसमें 15 दिन के फ्री लुकअप पीरियड के भीतर वापसी का अपवाद भी बताया गया है।
अन्य खातों की भी हो जांच, शिकायतकर्ता ने वीडियो बनाकर की जांच एवं कार्रवाई की मांग
प्रार्थी ने मांग की है कि मामले को केवल उसके ₹436 तक सीमित न रखा जाए। उसकी आशंका है कि उसकी तरह अन्य ग्राहकों के खातों से भी बिना स्पष्ट सहमति बीमा के नाम पर राशि काटी गई हो सकती है।
उसने मांग की है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा की जाए और यदि बिना ग्राहक की सहमति अथवा नियमों के विरुद्ध बीमा किए जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ग्राहक शिकायतें
सलखन शाखा से पहले भी ग्राहक संबंधी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। शाखा प्रबंधक दिग्विजय रस्तोगी पर कथित रूप से अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया था। वहीं, एक अन्य पूर्व मामले में केवाईसी के नाम पर वृद्ध ग्राहक से ₹100 लिए जाने की शिकायत सामने आई थी।
इन मामलों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन अलग-अलग शिकायतों के सामने आने के बाद शाखा की ग्राहक सेवा, दस्तावेजी प्रक्रिया और शिकायत निवारण व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध शिकायत एवं शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। बैंक अथवा संबंधित व्यक्तियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।
