Sonbhadra News: ओबरा इंटर कॉलेज की बदहाली पर फिर उठे सवाल, 1523 से घटकर 40-50 छात्र होने का दावा

ब्यूरो :- कृपा शंकर पांडेय
ओबरा/सोनभद्र। ऐतिहासिक ओबरा इंटर कॉलेज की बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर आवाज तेज होने लगी है। विद्यालय को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट सामने आने के बाद ग्रामीणों और पूर्व छात्रों के बीच नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी आसपास के 15 से 20 गांवों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहे इस विद्यालय की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में लगातार कमजोर हुई है।
ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2023 में विद्यालय में करीब 1523 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर महज 40 से 50 के आसपास रह गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
डीएवी संस्था को विद्यालय दिए जाने पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि निजी संस्था डीएवी को विद्यालय दिए जाने के बाद से शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। लोगों के मुताबिक विद्यालय में पर्याप्त संख्या में शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने विद्यालय की वर्तमान स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि छात्र संख्या में वास्तव में इतनी बड़ी गिरावट आई है तो इसके कारणों की पड़ताल होनी चाहिए।
तीन साल से मुख्य गेट पर नाम-पट्ट नहीं होने का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब तीन वर्षों से विद्यालय के मुख्य गेट पर ‘ओबरा इंटर कॉलेज’ का नाम-पट्ट तक नहीं लगाया गया है। आरोप है कि पुराने बोर्ड को पेंट कराने के बाद विद्यालय का नाम दोबारा नहीं लिखा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय जैसे ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान की पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए और मुख्य गेट पर उसका नाम प्रमुखता से दर्ज होना चाहिए।
पढ़ाई के साथ दूसरी व्यवस्थाओं पर भी सवाल
ग्रामीणों ने विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नियमित प्रार्थना और राष्ट्रगान जैसी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा खेलकूद और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
लोगों ने गेम टीचर से प्रवक्ता का कार्य कराने तथा कक्षा छह से आठ तक के संचालन को लेकर भी आपत्ति जताई है। इन आरोपों पर विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
रात में रोशनी की व्यवस्था पर भी चिंता
ग्रामीणों ने विद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि रात के समय परिसर में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से सुरक्षा संबंधी समस्या पैदा हो सकती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि विद्यालय परिसर में आवश्यक सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों और विद्यालय की संपत्ति की सुरक्षा बेहतर हो सके।
डीएवी को दोबारा हिस्सा दिए जाने की चर्चा से नाराजगी
इधर, विद्यालय के कुछ हिस्से को दोबारा डीएवी संस्था को दिए जाने की चर्चा से ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जिस विद्यालय में कभी बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते थे, वहां छात्र संख्या में कथित रूप से इतनी बड़ी गिरावट गंभीर चिंता का विषय है।
ग्रामीण और पूर्व छात्र यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि विद्यालय की स्थिति लगातार खराब हो रही है तो खंड शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से इसका संज्ञान लेकर जांच क्यों नहीं कराई जा रही है।
ग्रामीणों ने रखीं कई मांगें
ग्रामीणों की मांग है कि विद्यालय के मुख्य गेट पर तत्काल ‘ओबरा इंटर कॉलेज’ का नाम लिखाया जाए। इसके साथ ही इंटर कॉलेज की तरफ खुलने वाले गेट को बंद करने और इंटर कॉलेज के खेल मैदान में डीएवी के बच्चों के आने पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।
लोगों का कहना है कि विद्यालय की मूल पहचान, शैक्षणिक व्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समय रहते विद्यालय की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को निर्णायक रूप दिया जाएगा। सोशल मीडिया से शुरू हुई नाराजगी अब जमीन पर आंदोलन की तैयारी में बदलती नजर आ रही है।
हालांकि, विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और विद्यालय की वास्तविक स्थिति की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
