लोकायुक्त की जांच में घिरी आदर्श चोपन नगर पंचायत, फाइलें नहीं मिलीं तो जांच टीम हुई नाराज, संस्कार भवन का ताला तुड़वाकर किया निरीक्षण

संवाददाता – कृपा शंकर पांडेय

सोनभद्र – आदर्श नगर पंचायत चोपन में भवन नंबरिंग शुल्क और संस्कार भवन व जनसूचना से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश लोकायुक्त की जांच तेज हो गई है। लोकायुक्त के निर्देश पर अपर आयुक्त मिर्जापुर, संयुक्त निदेशक (जेसीडी) तथा कोषागार एवं वित्त विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम मंगलवार को चोपन पहुंची और नगर पंचायत कार्यालय के साथ-साथ काली मंदिर परिसर स्थित संस्कार भवन का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान शिकायत से संबंधित कई महत्वपूर्ण अभिलेख मौके पर उपलब्ध नहीं कराए जा सके, जिस पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई और अधिशासी अधिकारी अखिलेश सिंह को समस्त मूल पत्रावलियों के साथ अगले दिन मिर्जापुर कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए। जांच टीम ने सबसे पहले नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर भवन नंबरिंग शुल्क और संस्कार भवन से संबंधित अभिलेखों की जांच की। सूत्रों के अनुसार शिकायत में जिन दस्तावेजों और पत्रावलियों का उल्लेख किया गया था, उनमें से कई रिकॉर्ड अधिकारियों को मौके पर उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इस पर जांच अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया और आवश्यक अभिलेख तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जांच तथ्यों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। कार्यालय निरीक्षण के बाद टीम काली मंदिर परिसर स्थित संस्कार भवन पहुंची।

भवन लंबे समय से बंद होने के कारण उसकी चाबी मौके पर उपलब्ध नहीं हो सकी। काफी देर तक चाबी तलाशने के बाद कर्मचारियों ने ताला तोड़कर भवन का दरवाजा खोला। इसके बाद अधिकारियों ने भवन के प्रत्येक हिस्से का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान भवन की छत से पानी टपकने, दीवारों में नमी तथा भवन की जर्जर स्थिति सामने आई। अधिकारियों ने स्वयं छत पर जाकर उसका निरीक्षण किया और छत को क्षतिग्रस्त पाया। निरीक्षण के दौरान भवन की वर्तमान स्थिति और रखरखाव को लेकर भी अधिकारियों ने जानकारी एकत्र की। निरीक्षण के दौरान अधिशासी अधिकारी अखिलेश सिंह ने अधिकारियों को बताया कि संस्कार भवन की छत की मरम्मत के लिए लगभग 14.70 लाख रुपये का टेंडर प्रस्तावित किया गया है। इस पर मौके पर मौजूद कुछ स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि पूरा भवन ही जर्जर स्थिति में है तो केवल छत की मरम्मत पर इतनी बड़ी धनराशि खर्च करना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी मरम्मत के नाम पर सरकारी धन खर्च किया जा चुका है, लेकिन भवन की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।यह पूरा मामला सोनभद्र निवासी संजय कुमार जैन द्वारा लोकायुक्त में की गई शिकायत के बाद सामने आया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आदर्श नगर पंचायत चोपन द्वारा भवन नंबरिंग के नाम पर प्रति भवन 80 रुपये की वसूली की गई, जबकि इसके लिए किसी अधिनियम, नियमावली अथवा शासनादेश का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जनसुनवाई पोर्टल पर विभाग की ओर से अलग-अलग समय पर विरोधाभासी उत्तर दिए गए तथा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई सूचनाएं भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गईं।शिकायत में वर्ष 2010-11 में निर्मित संस्कार भवन का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भवन वर्ष 2017 से बंद पड़ा है और उसकी स्थिति को लेकर विभाग की ओर से अलग-अलग समय पर अलग-अलग कारण बताए गए।

कभी धनाभाव तो कभी छत क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई, जबकि बाद में भवन के जीर्णोद्धार के लिए लगभग 14.70 लाख रुपये का टेंडर जारी कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि भवन की जर्जर स्थिति को खदानों की ब्लास्टिंग से जोड़ना उचित नहीं है, क्योंकि आसपास के अन्य भवन सुरक्षित हैं। उन्होंने निर्माण कार्य, ठेका प्रक्रिया, भुगतान और रखरखाव में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोकायुक्त कार्यालय पहले ही शिकायत को प्रथम दृष्टया विचारणीय मानते हुए मंडलायुक्त मिर्जापुर के माध्यम से विस्तृत जांच कराने के निर्देश दे चुका है। जांच समिति को शिकायतकर्ता का पक्ष सुनने और निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। उल्लेखनीय है कि जांच प्रक्रिया जारी रहने तक शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और किसी अधिकारी की जिम्मेदारी या दोष तय होना अभी शेष है। स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत से सम्बंधित जेई पर भी उंगली उठाई है। उनका कहना है कि जेई लगभग 15 साल से ज्यादा समय से नगर पंचायत का कार्य देख रहे है। लंबे समय से रहने की वजह से उनका साठ-गाठ ठेकेदारों से हो गया है और ख़राब कार्य को भी पास कर एमबी जारी कर देते है। ऐसे में दूसरे जेई की नियुक्ति की बात लोगों ने कही।