बिहार बाढ़ 2026: गंगा के उफान से 27 लाख लोग प्रभावित, 13 जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त

कई इलाकों में सड़क और रेल यातायात प्रभावित, 1,429 नावें राहत-बचाव में जुटीं
पटना। बिहार में गंगा समेत कई नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों में करीब 27 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में घर, खेत और सड़कें जलमग्न हैं, जबकि कुछ स्थानों पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है। हालांकि पटना समेत कुछ क्षेत्रों में गंगा के जलस्तर में अब धीरे-धीरे कमी के संकेत मिल रहे हैं।
गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच गया है। अधिकारियों के मुताबिक सोमवार सुबह गांधी घाट पर गंगा 50.41 मीटर पर बह रही थी, जो खतरे के निशान से 1.57 मीटर ऊपर है।
गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां भी अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
27 लाख लोग प्रभावित, राहत अभियान तेज
बाढ़ से प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री और भोजन पहुंचाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर इंतजाम किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक विभिन्न बाढ़ प्रभावित जिलों में 190 सामुदायिक रसोइयां संचालित की जा रही हैं।
राहत और बचाव कार्यों के लिए 1,429 नावें तैनात की गई हैं। प्रशासन को तटबंधों की लगातार निगरानी करने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
कई इलाकों में सड़क और रेल यातायात प्रभावित
बाढ़ का असर सामान्य जनजीवन के साथ परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ा है। कई निचले इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं। भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में एनएच-80 पर भी यातायात प्रभावित हुआ है। वहीं बाढ़ के कारण पटना-गया रेलखंड पर कुछ ट्रेनों को रद्द किया गया है।
गांवों में बढ़ी मुश्किलें
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से जरूरत के अनुसार राहत शिविर और सामुदायिक रसोइयां संचालित की जा रही हैं।
बाढ़ के कारण खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। लंबे समय तक जलभराव रहने पर धान और दूसरी फसलों को नुकसान होने की आशंका है।
मुख्यमंत्री ने राहत व्यवस्था का लिया जायजा

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को वैशाली और भागलपुर में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चल रही सामुदायिक रसोइयों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने तथा तटबंधों और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।
अगले कुछ दिनों में राहत की उम्मीद
प्रशासन के मुताबिक गंगा के जलस्तर में कुछ स्थानों पर कमी आने लगी है। मुख्यमंत्री ने भी स्थिति में अगले दो-तीन दिनों में और सुधार की उम्मीद जताई है। हालांकि कई इलाकों में नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर हैं, इसलिए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
जांच/फैक्ट-चेक- ख़ुशी पाण्डेय
