सामग्री पर जाएं

सीआईएसएफ-डीएफआई के बीच एमओयू, ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमता को मिलेगी मजबूती.

Text:
11 September 2026 · Editorial Desk

Sonbhadra News: CISF और Drone Federation of India के बीच एमओयू हुआ है। ड्रोन, काउंटर-ड्रोन तकनीक, प्रशिक्षण और फोरेंसिक जांच से सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी।

ब्यूरो, कृपा शंकर पांडेय

सोनभद्र। देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को उभरते हवाई खतरों से सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। समझौते के तहत ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक, प्रशिक्षण, फोरेंसिक जांच और संयुक्त अभ्यास के माध्यम से सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जाएगा।

सीआईएसएफ मुख्यालय में हुआ समझौता

सीआईएसएफ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में समझौता ज्ञापन पर सीआईएसएफ की ओर से डॉ. सी. डी. नायक, डीआईजी एवं प्रिंसिपल, एमपीआरटीसी बहरोड़ और डीएफआई के अध्यक्ष स्मित शाह ने हस्ताक्षर किए।

इस दौरान सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन समेत बल के वरिष्ठ अधिकारी और डीएफआई के पदाधिकारी मौजूद रहे।

370 से अधिक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा

सीआईएसएफ वर्तमान में देशभर में 370 से अधिक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर रहा है। इनमें विमानन क्षेत्र, परमाणु संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र और तेल रिफाइनरी जैसे अति-संवेदनशील प्रतिष्ठान शामिल हैं।

महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को हवाई खतरों से सुरक्षा देने के लिए सीआईएसएफ को नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी भी दी गई है।

ड्रोन खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर जोर

ड्रोन तकनीक के तेजी से विस्तार और इससे जुड़े संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए संदिग्ध ड्रोन की समय रहते पहचान, निगरानी, ट्रैकिंग और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है।

सीआईएसएफ ने अपनी कार्यप्रणाली में ड्रोन तकनीक को शामिल किया है। अब तक 3,000 से अधिक कर्मियों को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। करीब 80 इकाइयां निगरानी, खतरे की पहचान और प्रशिक्षण के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।

आरटीसी बहरोड़ बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

एमओयू के तहत आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा।

डीएफआई भारतीय ड्रोन स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों के सहयोग से सीआईएसएफ की क्षमता निर्माण, व्यावहारिक अनुसंधान और परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में सहयोग करेगा।

यह भी पढ़ें: सोनभद्र से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण खबरें

ओबरा में पांच वर्षीय बच्ची से कथित यौन शोषण का मामला, पड़ोसी युवक हिरासत में

काउंटर-ड्रोन तैनाती के लिए तैयार होगा ढांचा

समझौते के तहत महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम की तैनाती के लिए एसओपी, डिप्लॉयमेंट फ्रेमवर्क और पायलट प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे।

इसके साथ ही संदिग्ध ड्रोन की गतिविधियों के विश्लेषण और घटना के बाद आकलन के लिए स्वदेशी फोरेंसिक उपकरण विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।

संयुक्त अभ्यास से परखी जाएगी तैयारी

ड्रोन घुसपैठ की पहचान, ट्रैकिंग और जवाबी कार्रवाई की तैयारियों को परखने के लिए संयुक्त ड्रिल और रेड-टीमिंग अभ्यास आयोजित किए जाएंगे।

प्रशिक्षण के लिए विशेष मॉड्यूल के साथ स्टूडेंट हैकथॉन और चैलेंज प्रोग्राम भी तैयार किए जाएंगे।

बदलते हवाई खतरों के खिलाफ मजबूत होगी तैयारी

सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि यह साझेदारी बदलते ड्रोन खतरों के खिलाफ सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने में अहम साबित होगी।

वहीं, डीएफआई अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा कि भारतीय ड्रोन उद्योग स्वदेशी तकनीकी नवाचारों के माध्यम से सीआईएसएफ की जरूरतों को पूरा करने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के लिए आत्मनिर्भर सुरक्षा ढांचा तैयार करने में सहयोग करेगा।