रितेश कुमार, संवाददाता
सोनभद्र।
सावन के दूसरे सोमवार के मौके पर गोठानी बाबा शोभनाथ नाथ धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे।
मंदिर परिसर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
सावन के सोमवार को भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। उत्तर भारत में इस वर्ष सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है।
सोमवार के दिन सावन और सोम प्रदोष का संयोग भी बन रहा है, जिसके चलते शिवभक्तों के लिए यह दिन और विशेष माना जा रहा है।
सुबह से ही गोठानी बाबा शोभनाथ धाम में “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष सुनाई देते रहे। बारिश और मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई।
महिलाएं, पुरुष और युवा बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का दर्शन और पूजन करते दिखाई दिए।
सावन के सोमवार को क्यों की जाती है भगवान शिव की पूजा?
धार्मिक परंपरा में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है।
सावन के प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शिव मंदिरों में जाकर जलाभिषेक, पूजा-पाठ और मंत्र जाप करते हैं।
मान्यता है कि सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन है और सावन के महीने में शिव आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति, परिवार में सुख-समृद्धि और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-शांति की कामना से भी सावन सोमवार का व्रत रखते हैं।
हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं का संबंध आस्था से है और इन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध स्वास्थ्य या जीवन-परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है?
सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर पहले भगवान शिव का दर्शन करते हैं और फिर शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार जलाभिषेक भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। भक्त जल अर्पित करते हुए भगवान शिव से सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
सावन सोमवार की पूजा में जलाभिषेक के दौरान “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने की परंपरा भी है।
कैसे किया जाता है सावन सोमवार का पूजन?
सावन सोमवार की पूजा घर या मंदिर, दोनों जगह की जा सकती है। सामान्य रूप से श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनते हैं और भगवान शिव की पूजा का संकल्प लेते हैं।
इसके बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और उपलब्धता के अनुसार बेलपत्र, फूल, फल आदि भी अर्पित करते हैं।
इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप किया जाता है।
कई भक्त सोमवार को व्रत भी रखते हैं। कोई पूरे दिन निराहार रहता है तो कुछ लोग फलाहार या अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सात्विक भोजन करते हैं।
व्रत रखना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है; पूजा और भक्ति बिना व्रत के भी की जा सकती है।
आज सोम प्रदोष का भी संयोग
इस बार सावन के दूसरे सोमवार के साथ सोम प्रदोष का भी संयोग बन रहा है। प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि से जुड़ा होता है और जब त्रयोदशी सोमवार को आती है तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता में प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास का समय भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है।
इस अवसर पर शाम के समय भी श्रद्धालु शिव मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना, दीप प्रज्वलन और शिव मंत्रों का जाप करते हैं।
भक्ति में डूबा नजर आया धाम

गोठानी बाबा शोभनाथ नाथ धाम में सोमवार सुबह से ही भक्तिमय माहौल बना रहा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार जारी रही। लंबी कतार में खड़े भक्त अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान शिव का नाम लेते नजर आए।
कई श्रद्धालु अपने साथ गंगाजल और पूजा सामग्री लेकर पहुंचे। जलाभिषेक के बाद भक्तों ने भगवान भोलेनाथ से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की।
सावन के दूसरे सोमवार पर धाम का पूरा वातावरण शिवमय नजर आया। श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक का यह अवसर आस्था, विश्वास और भक्ति से जुड़ा रहा।
गोठानी बाबा शोभनाथ नाथ धाम में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर दिखाया कि भोलेनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था कितनी गहरी है।
