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मथुरा-वृंदावन के 12 किमी पुराने रेल ट्रैक पर बनेगी सड़क, ब्रज की 200 धरोहरों को भी मिलेगा नया जीवन

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4 September 2026 · Editorial Desk

अजय तिवारी, चीफ़ एडिटर

ब्रज की 200 धरोहरों के संरक्षण और चौरासी कोस परिक्रमा के विकास की भी योजना।

मथुरा और वृंदावन के बीच कभी चलने वाली रेलबस अब बीते दौर की बात हो चुकी है। करीब 12 किलोमीटर लंबे इस पुराने रेल मार्ग को लेकर अब एक नई योजना सामने आई है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की 9वीं बैठक में इस ट्रैक पर सड़क विकसित करने के प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही ब्रज क्षेत्र की करीब 200 पुरानी धरोहरों और स्मारकों के संरक्षण के लिए ‘तीर्थ मित्र’ योजना शुरू करने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में ब्रज क्षेत्र में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, यातायात व्यवस्था, पार्किंग, परिक्रमा मार्ग और विरासत संरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में तय योजनाओं का असर आने वाले समय में मथुरा-वृंदावन आने वाले स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं, दोनों पर पड़ सकता है।

जिस ट्रैक पर चलती थी रेलबस, अब वहां सड़क की तैयारी

मथुरा और वृंदावन के बीच करीब 12 किलोमीटर लंबा मीटर गेज रेल मार्ग था। इसी मार्ग पर एक डिब्बे वाली रेलबस चलती थी, जो अपनी अलग पहचान के कारण यात्रियों और श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय थी। उपलब्ध पुरानी रिपोर्टों के मुताबिक इस रेलबस सेवा का संचालन करीब 24 वर्षों तक हुआ था।

बाद में मीटर गेज लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने की योजना के चलते इस मार्ग पर रेल सेवा बंद कर दी गई। अब ब्रज तीर्थ विकास परिषद की बैठक में इसी बंद पड़े रेल ट्रैक पर सड़क विकसित करने की योजना सामने आई है।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मथुरा और वृंदावन के बीच धार्मिक पर्यटन के कारण लगातार आवाजाही रहती है। सड़क बनने से इस मार्ग को भविष्य में स्थानीय यातायात के लिए इस्तेमाल करने की संभावना बढ़ेगी।

हालांकि, सड़क की अंतिम लागत, निर्माण की समयसीमा और निर्माण एजेंसी की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित विकास कार्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

ब्रज की 200 धरोहरों के संरक्षण की तैयारी

बैठक में ब्रज क्षेत्र की करीब 200 चिह्नित पुरानी और जर्जर धरोहरों एवं स्मारकों के संरक्षण की योजना भी सामने आई। इसके लिए संस्कृति विभाग की ‘स्मारक मित्र’ योजना की तर्ज पर ‘तीर्थ मित्र’ योजना शुरू करने की बात कही गई है।

इस योजना का उद्देश्य सिर्फ पुरानी इमारतों की मरम्मत करना नहीं, बल्कि ब्रज की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी इन संरचनाओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।

ब्रज क्षेत्र में धार्मिक स्थलों के साथ बड़ी संख्या में पुराने मंदिर, भवन, घाट और दूसरी ऐतिहासिक संरचनाएं मौजूद हैं। ऐसे में इनका संरक्षण पर्यटन और स्थानीय विरासत, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

तीन साल में विकसित होगा चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग

बैठक में ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा के विकास को भी प्राथमिकता दी गई। मुख्यमंत्री ने इससे जुड़े विकास कार्यों को अगले तीन वर्षों में पूरा करने के निर्देश दिए।

मथुरा जिला प्रशासन के अनुसार ब्रज की परिक्रमा लगभग 360 किलोमीटर की है। इसमें मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल, महावन और बलदेव समेत ब्रज के कई प्रमुख धार्मिक क्षेत्र आते हैं।

परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं के पैदल चलने को ध्यान में रखते हुए रास्तों के निर्माण में ऐसी सामग्री इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है, जिससे बारिश के समय फिसलन कम हो और पैदल यात्रियों को परेशानी न हो।

पार्किंग से लेकर डॉर्मिटरी और फूड कोर्ट तक की योजना

ब्रज क्षेत्र में बढ़ती भीड़ को देखते हुए होल्डिंग एरिया और मल्टीलेवल पार्किंग विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई।

इन स्थानों पर केवल पार्किंग की सुविधा नहीं होगी। प्रस्ताव के अनुसार यहां डॉर्मिटरी, कैफे और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा सकती हैं। इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP या रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर काम करने की संभावना है।

इसका सीधा फायदा यह हो सकता है कि प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास वाहनों का दबाव कम किया जा सके और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने और खाने-पीने की सुविधाएं एक जगह मिल सकें।

गोवर्धन परिक्रमा में 10 गोल्फ कार्ट का प्रस्ताव

गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 10 गोल्फ कार्ट उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी बैठक में चर्चा हुई। यह प्रस्ताव हैदराबाद स्थित हार्टफुलनेस फाउंडेशन की ओर से दिया गया है।

खासकर बुजुर्ग और लंबे पैदल रास्ते पर चलने में असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए ऐसी सुविधा उपयोगी हो सकती है।

नए सिटी बस रूट में भी सावधानी

वृंदावन में नए सिटी बस रूट को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उन्हीं वाहनों का संचालन किया जाए जो संबंधित सड़कों की चौड़ाई और यातायात व्यवस्था के अनुकूल हों। इसका उद्देश्य ऐसी सड़कों पर बड़े वाहनों से होने वाली परेशानी को रोकना है जहां उनकी आवाजाही व्यावहारिक नहीं है।

जन्माष्टमी से पहले सुरक्षा और सफाई पर जोर

कृष्ण जन्माष्टमी को देखते हुए बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी निर्देश दिए गए। पुलिस गश्त बढ़ाने और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में लगातार कर्मचारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा गया।

सफाई व्यवस्था में दो शिफ्ट में सफाई, घर-घर से कूड़ा उठाने और कचरे के प्रभावी निस्तारण पर भी जोर दिया गया।

मथुरा-वृंदावन के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

रेलबस के पुराने 12 किलोमीटर ट्रैक को सड़क में बदलने की योजना सिर्फ परिवहन से जुड़ा बदलाव नहीं है। इसके साथ पार्किंग, सिटी बस, परिक्रमा मार्ग और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को जोड़कर देखा जाए तो ब्रज क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन के बढ़ते दबाव के हिसाब से परिवहन ढांचा बदलने की कोशिश नजर आती है।

फिलहाल इन योजनाओं का वास्तविक असर इनके जमीन पर उतरने के बाद ही पता चलेगा। खास तौर पर सड़क परियोजना की लागत, निर्माण की समयसीमा और विस्तृत नक्शा सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि मथुरा-वृंदावन के बीच पुराने रेल मार्ग का नया स्वरूप कितना बड़ा बदलाव लेकर आता है।

तथ्य-जांच: मथुरा-वृंदावन रेलबस का पुराना 12 किमी मीटर-गेज मार्ग और उसकी पूर्व सेवा अवधि की जानकारी पुरानी प्रकाशित रिपोर्टों से मिलती है; वर्तमान सड़क और ‘तीर्थ मित्र’ योजना संबंधी जानकारी 4 सितंबर 2026 की बैठक संबंधी रिपोर्टों से ली गई है।