नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और ईरान की सैन्य कार्रवाई की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। इसका असर ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों पर भी दिखाई दिया, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की उम्मीदों को झटका लग सकता है।
ब्रेंट और WTI दोनों में तेजी
ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का भाव 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर दर्ज किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

होर्मुज में सैन्य कार्रवाई से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अपने बताए गए “दुश्मन ठिकानों” को निशाना बनाया। फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार गुरुवार रात क़ेश्म (Qeshm) द्वीप के पास विस्फोटों की घटनाओं के बाद यह कार्रवाई हुई। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अमेरिकी जहाजों पर रोक की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ओमान के साथ प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिकी जहाजों को इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से दूर रखना चाहता है। साथ ही, इजरायली जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाने और कुछ देशों से इस मार्ग के उपयोग के बदले शुल्क लेने की योजना पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।
समझौते को लेकर अभी भी अनिश्चितता
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर किसी स्थायी समझौते की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। निवेशकों की नजर इस क्षेत्र में होने वाले हर घटनाक्रम पर बनी हुई है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है।
बातचीत और तनाव साथ-साथ
ईरान और अमेरिका के बीच एक ओर बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी ओर तनाव भी लगातार बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में उम्मीद जताई कि संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर अभी भी मतभेद बरकरार हैं। अमेरिका समुद्री मार्ग पर निर्बाध आवाजाही चाहता है, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर जोर दे रहा है।
मध्य-पूर्व में बढ़ता संघर्ष
क्षेत्रीय तनाव केवल होर्मुज तक सीमित नहीं है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने यमन में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई का दावा किया है। इससे पहले अदन की खाड़ी में एक सऊदी टैंकर पर हमले और लाल सागर में जहाजों को दी गई धमकियों ने भी वैश्विक बाजार की चिंता बढ़ा दी थी।
भारत में पेट्रोल-डीजल पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल के दाम केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करते। इनमें रुपये-डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और केंद्र व राज्य सरकारों के कर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर खुदरा कीमतों पर तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं होता।
