उज्जैन में 4 दिन तक नहीं हिली खड़े हनुमान जी की प्रतिमा, मशीनों ने मानी हार

सड़क चौड़ीकरण की जद में आया 170 साल पुराना मंदिर, प्रतिमा को सुरक्षित हटाना बना प्रशासन के लिए चुनौती
उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के बीच प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने की कोशिश चर्चा का विषय बन गई है। प्रशासन और नगर निगम की टीम ने चार दिनों में कई बार क्रेन, JCB और अन्य भारी मशीनों की मदद से प्रतिमा को सुरक्षित स्थानांतरित करने का प्रयास किया, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली।
मंदिर का ढांचा हटाया गया, प्रतिमा अपनी जगह कायम
कंठाल चौराहे से छत्री चौक के बीच चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य की जद में मंदिर आया है। रिपोर्टों के मुताबिक मंदिर के बाहरी हिस्से और गर्भगृह को हटाया जा चुका है, लेकिन मुख्य प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से निकालना चुनौती बन गया है। फिलहाल प्रतिमा को मौके पर ही कैनोपी के नीचे सुरक्षित रखा गया है।
क्रेन और JCB से भी नहीं हिली प्रतिमा

प्रतिमा को हटाने के लिए लगातार चार दिनों तक प्रयास किए गए। भारी मशीनरी का इस्तेमाल भी किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। प्रतिमा को ज्यादा ताकत लगाकर हटाने से नुकसान या दरार आने की आशंका के चलते अब भारी मशीनों के इस्तेमाल को रोक दिया गया है।
अब तकनीकी जांच से पता चलेगा क्या है स्थिति
प्रतिमा के आधार और उसके आसपास की जमीन को समझने के लिए खुदाई भी की गई है। अब पुरातत्व विशेषज्ञ प्रतिमा, उसके आधार और आसपास की मिट्टी की तकनीकी जांच करने की तैयारी में हैं। जांच के बाद ही यह तय किया जाएगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं।
प्रतिमा के इतिहास को लेकर भी चर्चा
खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा की उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञों ने इसके राजा भोज के काल से जुड़े होने की संभावना जताई है। हालांकि प्रतिमा की वास्तविक उम्र और इतिहास की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी बताई गई है।
श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी
प्रतिमा को हटाने की कोशिशों की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुंच रहे हैं। कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि प्रशासन के सामने सड़क चौड़ीकरण और प्रतिमा को सुरक्षित रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
फिलहाल प्रतिमा को नुकसान से बचाना प्राथमिकता है और आगे की कार्रवाई विशेषज्ञों की जांच के बाद तय होने की संभावना है।
जांच/फैक्ट-चेक: ख़ुशी पाण्डेय
