लेखक -खुशी
कई लोगों की आदत होती है कि खाली बैठे हों तो उंगलियां चटकाने लगते हैं। कभी तनाव में, कभी काम के बीच और कभी सिर्फ इसलिए कि उंगलियां चटकने के बाद मिलने वाला एहसास अच्छा लगता है।
चटकने की आवाज भी कुछ लोगों को सुकून देती है।
लेकिन इस छोटी-सी आदत को लेकर एक सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है—क्या उंगलियां चटकाने से आगे चलकर आर्थराइटिस हो सकता है?
बचपन से ही बहुत से लोगों ने यह बात सुनी होगी कि बार-बार उंगलियां चटकाने से जोड़ खराब हो जाते हैं।
मगर अब तक उपलब्ध शोध इस डर की पुष्टि नहीं करते।
हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं है कि जोड़ को जरूरत से ज्यादा जोर लगाकर चटकाना हमेशा सुरक्षित है।
50 साल तक खुद पर किया अनोखा प्रयोग
उंगलियां चटकाने और आर्थराइटिस के बीच संबंध को लेकर डॉक्टर डोनाल्ड उंगर ने एक दिलचस्प प्रयोग किया था।
बचपन में उनकी मां, मौसियों और बाद में उनकी सास उन्हें उंगलियां चटकाने से रोकती थीं।
उनका मानना था कि ऐसा करने से आगे चलकर आर्थराइटिस हो सकता है।
उंगर ने इस धारणा को परखने के लिए करीब 50 वर्षों तक अपने बाएं हाथ की उंगलियां नियमित रूप से चटकाईं, जबकि दाएं हाथ की उंगलियों को नहीं चटकाया।
इस दौरान उन्होंने अनुमानतः 36 हजार बार ऐसा किया।
जब वह 72 वर्ष के हुए तो उन्होंने दोनों हाथों का एक्स-रे कराया। नतीजा दिलचस्प था—दोनों हाथों में आर्थराइटिस के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले और दोनों हाथों के बीच भी ऐसा अंतर नहीं दिखा,
जिससे उंगलियां चटकाने को नुकसान का कारण माना जा सके।
हालांकि यह सिर्फ एक व्यक्ति का प्रयोग था, इसलिए इसे अंतिम वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
फिर भी बाद के कई अध्ययनों के नतीजे भी इसी दिशा में रहे हैं।
आखिर उंगली चटकने पर आवाज आती क्यों है?
उंगली चटकने की आवाज सुनकर ऐसा लगता है जैसे जोड़ के अंदर कुछ टूट या फट रहा हो। असल में ऐसा नहीं होता।
हमारे जोड़ों के आसपास साइनोवियल फ्लूइड नाम का एक तरल मौजूद रहता है।
यह जोड़ों को चिकनाई देता है और हड्डियों के बीच होने वाली गतिविधि को आसान बनाता है।
जब उंगली को खींचा या मोड़ा जाता है तो जोड़ के अंदर की जगह थोड़ी बदलती है। इससे वहां दबाव में बदलाव आता है और तरल में मौजूद गैसों से बुलबुले बनने की प्रक्रिया होती है।
इसी प्रक्रिया से चटकने की आवाज पैदा होती है।
वैज्ञानिकों ने अल्ट्रासाउंड की मदद से इस प्रक्रिया को देखा भी है।
जोड़ के चटकने के समय स्क्रीन पर अचानक होने वाला बदलाव काफी तेज दिखाई देता है।
क्या हर तरह से उंगलियां चटकाना सुरक्षित है?

यहां थोड़ी सावधानी जरूरी है।
सामान्य तौर पर उंगलियां चटकाने की आदत को नुकसानदायक नहीं माना जाता, लेकिन अगर कोई व्यक्ति जोड़ को चटकाने के लिए बहुत ज्यादा ताकत लगाता है या उंगली को असामान्य तरीके से मोड़ता-खींचता है तो चोट लग सकती है।
ऐसे मामलों में मोच, खिंचाव या दर्द हो सकता है।
गर्दन जैसे संवेदनशील हिस्सों को बहुत जोर से चटकाने पर समस्या और गंभीर हो सकती है।
इसलिए अगर उंगली चटकाते समय सिर्फ आवाज आती है और कोई दर्द या सूजन नहीं होती, तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती।
लेकिन दर्द, सूजन, जकड़न या जोड़ की गतिविधि में परेशानी महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
क्या उंगलियां चटकाने से आर्थराइटिस होता है?
सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि उंगलियां चटकाने से ऑस्टियोआर्थराइटिस हो जाता है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसता है। उम्र बढ़ने, चोट, वजन और कई अन्य कारण इसके जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
लेकिन उपलब्ध अध्ययनों में उंगलियां चटकाने को इसका सीधा कारण नहीं पाया गया है।
1975 में किए गए एक अध्ययन में नियमित रूप से उंगलियां चटकाने वाले बुजुर्गों और ऐसा नहीं करने वाले लोगों में जोड़ों की समस्या की तुलना की गई। दोनों समूहों में डीजेनरेटिव आर्थराइटिस की दर में कोई खास अंतर नहीं मिला।
बाद के एक अध्ययन में भी ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों की उंगलियां चटकाने की पुरानी आदत की तुलना ऐसे लोगों से की गई जिन्हें यह बीमारी नहीं थी।
इसमें भी यह नहीं पाया गया कि जिंदगी भर ज्यादा बार उंगलियां चटकाने से ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ता है।
क्या हाथों की पकड़ कमजोर हो जाती है?

एक और आम धारणा है कि उंगलियां चटकाने से हाथों की पकड़ यानी ग्रिप स्ट्रेंथ कमजोर हो जाती है।
पुराने समय में किए गए एक अध्ययन में ऐसा संकेत जरूर मिला था कि लंबे समय से उंगलियां चटकाने वाले लोगों की पकड़ कमजोर हो सकती है। लेकिन बाद में हुए शोधों ने इस संबंध की पुष्टि नहीं की।
2017 में प्रकाशित एक अध्ययन में उंगलियां चटकाने की आदत और हाथों की पकड़ कमजोर होने के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया।
इसलिए सिर्फ उंगलियां चटकाने की वजह से हाथों की ताकत कम होने की बात को वैज्ञानिक रूप से पक्की नहीं माना जा सकता।
कुछ लोगों को चटकाने के बाद राहत क्यों मिलती है?
कई लोग बताते हैं कि उंगलियां चटकाने के बाद उन्हें हाथों में हल्कापन महसूस होता है। कुछ लोगों को ऐसा भी लगता है कि जोड़ थोड़ी देर के लिए ज्यादा आसानी से घूमने लगा है।
इसके पीछे एक संभावना यह बताई जाती है कि जोड़ को चटकाने के दौरान आसपास की नसों पर असर पड़ता है और मांसपेशियों को थोड़ी देर के लिए आराम मिल सकता है।
हालांकि, इससे दर्द कम होने या एंडोर्फिन रिलीज होने जैसी कुछ संभावित व्याख्याएं मौजूद हैं, लेकिन इनके बारे में अभी पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
आदत छोड़ना चाहते हैं तो क्या करें?

अगर आपको उंगलियां चटकाने की आदत है और आप इसे छोड़ना चाहते हैं तो सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि आप ऐसा कब और क्यों करते हैं।
क्या आप तनाव में ऐसा करते हैं? बोरियत में? या फिर काम करते समय अपने हाथों को व्यस्त रखने के लिए?
इन कारणों को पहचानना आदत बदलने में मदद कर सकता है। जरूरत पड़ने पर कॉग्निटिव थेरेपी जैसी तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है।
हाथों को व्यस्त रखने के लिए स्ट्रेस बॉल या फिडजेट टॉय का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
तो आखिर निष्कर्ष क्या है?
सिर्फ उंगलियां चटकाने से आर्थराइटिस होने का कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसी तरह इससे हाथों की ग्रिप कमजोर होने की बात भी मौजूदा शोधों से साबित नहीं होती।
हां, जोड़ को बहुत जोर से चटकाना या दर्द होने के बावजूद ऐसा करते रहना सही नहीं है। अगर उंगलियां चटकाते समय दर्द, सूजन या जकड़न होती है तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर रहेगा।
बाकी अगर सिर्फ चटकने की आवाज आती है और कोई परेशानी नहीं होती, तो इस आदत को लेकर बेवजह डरने की जरूरत नहीं है।
हां, आसपास बैठे लोगों को आपकी लगातार ‘टक-टक’ की आवाज परेशान जरूर कर सकती है!
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