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RBI का बड़ा फैसला! 31 अगस्त को बंद होगा खास डॉलर विंडो, भारत में आया 56.85 अरब डॉलर का विदेशी पैसा

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17 August 2026 · Editorial Desk

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा से जुड़ी अपनी एक खास सुविधा को तय समय से पहले बंद करने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक ने FCNR(B) जमा के लिए विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत नई जमा जुटाने की अंतिम तारीख को एक महीने पहले करते हुए 31 अगस्त 2026 कर दिया है। पहले यह सुविधा 30 सितंबर तक उपलब्ध थी।

RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब इस सुविधा के जरिए विदेशी मुद्रा का प्रवाह उम्मीद से काफी ज्यादा रहा है। 13 अगस्त 2026 तक तीनों channels से कुल 56.85 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा inflow आया था। इनमें अकेले FCNR(B) deposits के जरिए करीब 52.3 अरब डॉलर जुटाए गए।

RBI ने क्यों घटाई समयसीमा?

RBI ने जून 2026 में यह विशेष स्वैप सुविधा शुरू की थी। इसका उद्देश्य भारतीय बैंकों को गैर-निवासी भारतीयों (NRIs) से विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना और देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाना था।

इस योजना के तहत बैंकों को पात्र FCNR(B) deposits के बदले RBI के साथ डॉलर-रुपया swap करने की सुविधा मिली। इससे बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा जुटाने और उससे जुड़े currency risk को manage करना आसान हुआ।

लेकिन योजना को उम्मीद से कहीं ज्यादा प्रतिक्रिया मिली। 13 अगस्त तक FCNR(B) route से ही 52.3 अरब डॉलर जुट गए। इसके बाद RBI ने नई FCNR(B) deposits जुटाने की deadline को 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त कर दिया।

भारत में कितना आया विदेशी पैसा?

RBI के आंकड़ों के मुताबिक 13 अगस्त तक:

  • FCNR(B) deposits: करीब $52.3 billion
  • Overseas Foreign Currency Borrowings: करीब $2.805 billion
  • External Commercial Borrowings: करीब $1.741 billion
  • कुल inflow: करीब $56.846 billion

यानी भारत में विदेशी मुद्रा का प्रवाह करीब 57 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

क्या 31 अगस्त के बाद FCNR(B) deposits बंद हो जाएंगे?

नहीं। यहां एक बात समझना जरूरी है।

RBI ने FCNR(B) deposits को बंद नहीं किया है, बल्कि इस विशेष concessional swap facility के तहत नई deposits जुटाने की समयसीमा घटाई है।

इस सुविधा के तहत 31 अगस्त तक जुटाई गई पात्र deposits के लिए बैंक 11 सितंबर 2026 तक RBI के साथ संबंधित swaps कर सकते हैं।

रुपये को क्या फायदा हुआ?

इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाना था। जब भारतीय बैंक विदेशों से ज्यादा डॉलर जुटाते हैं तो विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की supply को समर्थन मिलता है। इससे रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि रुपये की दिशा केवल इस एक factor पर निर्भर नहीं करती। कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश, वैश्विक डॉलर की मजबूती, व्यापार घाटा और भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी रुपये पर असर डालती हैं।

Reuters के अनुसार, इस सुविधा से आए बड़े inflows ने भारत की balance-of-payments स्थिति को भी बेहतर किया है और विदेशी मुद्रा भंडार को समर्थन मिला है।

बैंक अब क्या करेंगे?

FCNR(B) window को जल्दी बंद किए जाने के बाद भारतीय बैंक अपनी विदेशी मुद्रा जरूरतों के लिए दूसरे रास्तों पर भी ध्यान दे रहे हैं।

Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक कई बड़े भारतीय बैंक अगले कुछ सप्ताह में विदेशी बाजारों से डॉलर जुटाने की तैयारी तेज कर रहे हैं।

हालांकि RBI की सुविधा के तहत ECB और OFCB वाले दूसरे swap windows 31 दिसंबर 2026 तक खुले रहने हैं।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले का आम बैंक ग्राहक पर सीधा असर सीमित है। यह सुविधा मुख्य रूप से बैंकों और विदेशी मुद्रा जुटाने से संबंधित है।

लेकिन इसका अप्रत्यक्ष असर रुपये और विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है। अगर डॉलर की उपलब्धता बेहतर रहती है तो रुपये पर दबाव कम हो सकता है। वहीं रुपये की मजबूती या कमजोरी का असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, आयातित सामान, विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा जैसी चीजों की लागत पर पड़ सकता है।

RBI के फैसले से क्या संकेत मिला?

सबसे बड़ा संकेत यह है कि RBI को इस विशेष सुविधा से अपेक्षा से कहीं ज्यादा विदेशी मुद्रा मिली है। करीब 57 अरब डॉलर के कुल inflow के बाद केंद्रीय बैंक ने FCNR(B) window को निर्धारित समय से पहले बंद करने का फैसला किया है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि रुपये पर दबाव पूरी तरह खत्म हो गया है। वैश्विक बाजार और भारत की विदेशी मुद्रा जरूरतों के हिसाब से RBI आगे भी अपने forex management tools का इस्तेमाल कर सकता है।

RBI का FCNR(B) swap window को 31 अगस्त 2026 को बंद करने का फैसला विदेशी मुद्रा के मजबूत inflow के बीच आया है। इस सुविधा के जरिए अकेले FCNR(B) deposits से करीब 52.3 अरब डॉलर, जबकि तीनों channels से लगभग 56.85 अरब डॉलर जुटाए गए हैं।

अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि इन विदेशी मुद्रा inflows का रुपये, विदेशी मुद्रा भंडार और भारतीय बैंकों की dollar funding पर आगे कितना असर पड़ता है।