भारत का बड़ा सोलर प्लान: पानी पर लगेंगे सोलर पैनल, ₹5,070 करोड़ की योजना को मंजूरी

नई दिल्ली: भारत ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देश के जलाशयों और अन्य उपयुक्त जल निकायों पर 5,000 मेगावाट यानी 5 GW फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के लिए कुल ₹5,070 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
पानी की सतह पर तैयार होंगे सोलर पावर प्लांट
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं में सोलर पैनल जमीन पर लगाने के बजाय पानी की सतह पर तैरते प्लेटफॉर्म पर लगाए जाते हैं। सरकार की नई योजना के तहत इन परियोजनाओं को एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) के साथ विकसित किया जाएगा।
योजना में कम से कम दो घंटे की स्टोरेज क्षमता का प्रावधान है। 5 GW क्षमता के साथ लगभग 10,000 MWh एनर्जी स्टोरेज विकसित करने का लक्ष्य है।
जमीन की जरूरत होगी कम
फ्लोटिंग सोलर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत नहीं पड़ती। जलाशयों और अन्य उपयुक्त जल निकायों की सतह का इस्तेमाल करके बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
इसके अलावा, विशेषज्ञों के अनुसार पानी के ऊपर लगे सोलर पैनलों को ठंडा रखने में मदद मिल सकती है और कुछ परिस्थितियों में यह बिजली उत्पादन के लिए फायदेमंद हो सकता है।
भारत में 102 GW से ज्यादा फ्लोटिंग सोलर की क्षमता
केंद्र सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) के आकलन में भारत में करीब 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर क्षमता की संभावना सामने आई है।
सरकार ने जून 2026 में बताया था कि देश के जलाशय और अन्य जल निकाय फ्लोटिंग सोलर के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बन सकते हैं।
कब तक लागू होगी योजना?
सरकार के अनुसार इस योजना के तहत परियोजनाओं को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान मंजूरी दी जाएगी। वित्तीय सहायता का वितरण आगे 2032-33 तक जारी रह सकता है।
पात्र फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद ₹1 करोड़ प्रति मेगावाट तक केंद्रीय वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के विस्तार से सोलर पैनल निर्माण, इंजीनियरिंग, इंस्टॉलेशन, रखरखाव और एनर्जी स्टोरेज से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
भारत के लिए यह पहल सिर्फ सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा भंडारण, जमीन की बचत और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
क्या है फ्लोटिंग सोलर?
फ्लोटिंग सोलर में फोटोवोल्टिक पैनल को विशेष तैरते हुए ढांचे पर स्थापित किया जाता है। इन ढांचों को पानी की सतह पर एंकर किया जाता है और वहां से सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।
भारत में पहले से कई बड़े फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट मौजूद हैं और नई योजना के बाद इस क्षेत्र में निवेश तथा परियोजनाओं की संख्या बढ़ने की संभावना है।
