चीफ ब्यूरो, सोनभद्र
सलखन : देश में एक तरफ जहां डिजिटल बैंकिंग और ‘ग्राहक सेवा सर्वोपरि’ का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद से बैंकिंग व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इंडियन बैंक की सलखन शाखा के शाखा प्रबंधक (Branch Manager) श्री दिग्विजय रस्तोगी पर एक प्रतिष्ठित स्थानीय व्यवसायी के साथ अत्यंत अभद्र, अपमानजनक और अमर्यादित व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
पीड़ित कारोबारी ने इस बदसलूकी के खिलाफ सीधे इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक (MD & CEO) को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच और कठोर विभागीय कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस शिकायत की प्रतिलिपि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (DFS) के सचिव सहित बैंक के सभी शीर्ष अधिकारियों को भेजी गई है। CCTV फुटेज को साक्ष्य बनाने की मांग, मेडिकल चेकअप की भी अपील
क्या है पूरा मामला?
देवी हार्डवेयर एवं गारमेंट्स के प्रोपराइटर और इंडियन बैंक के वर्षों पुराने खाताधारक ज्ञानेन्द्र पाठक ने अपनी शिकायत में बताया कि दिनांक 7 जुलाई 2026 को वह अपने दो बच्चों के साथ NEFT/RTGS के सिलसिले में सलखन शाखा गए थे। काम पूरा होने के बाद उन्होंने शाखा प्रबंधक दिग्विजय रस्तोगी से बार-बार बैंक आने की असुविधा से बचने के लिए अपने चालू (Current) और CC खाते में इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा चालू करने का अनुरोध किया।
आरोप है कि इस सामान्य और वैध मांग पर शाखा प्रबंधक अपना आपा खो बैठे और उन्होंने ग्राहक के लिए कथित रूप से बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
शिकायत करने की चेतावनी पर अहंकार: “सब अधिकारियों को देख लूंगा”
जब पीड़ित ग्राहक ने इस तरह की भाषा पर आपत्ति जताई और मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही, तो आरोप है कि मैनेजर ने और अधिक आक्रामक होकर अहंकारपूर्ण लहजे में चुनौती दी।
शिकायतकर्ता के मुताबिक मैनेजर ने कहा, “जाओ-जाओ, बहुत देखे हैं तुम्हारे जैसे। मुझे मत सिखाओ। नहीं चाहिए तुम्हारा अकाउंट, बंद करवा दो। जहाँ शिकायत करनी है कर दो, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। पहले भी लोगों ने शिकायत की थी, मेरा कुछ नहीं हुआ। सब अधिकारियों को देख लेंगे। जो मैं चाहूँगा वही होगा।”
बच्चों के सामने आत्मसम्मान को लगी ठेस
इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि यह सब व्यवसायी के मासूम बच्चों के सामने हुआ। पीड़ित ज्ञानेन्द्र पाठक ने पत्र में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा है कि बच्चों के सामने “अनपढ़” और “गंवार” जैसे शब्दों से संबोधित किया जाना एक पिता के रूप में उनके लिए मानसिक रूप से अत्यंत कष्टदायक था, जिससे बच्चों के मन में भी बैंक के प्रति नकारात्मक धारणा बनी है।
पहले भी LDM सोनभद्र की जांच पर उठे गंभीर सवाल; ‘कैमरा’ देखते ही भागे अधिकारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब सोनभद्र के अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) जांच के लिए मौके पर पहुंचे, तो उम्मीद थी कि पीड़ित को न्याय मिलेगा। लेकिन ग्राउंड से मिल रही जानकारी के मुताबिक, LDM ने पूरी तरह से एकतरफा जांच प्रक्रिया अपनाई।
पीड़ित कारोबारी ज्ञानेन्द्र पाठक ने बताया कि पहले भी जब उन्होंने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच अधिकारी (LDM) के सामने वीडियो कैमरे पर अपना बयान दर्ज कराने का आग्रह किया, तो अधिकारी भड़क गए। LDM ने कैमरे के सामने बयान लेने से साफ तौर पर इनकार कर दिया और बिना पीड़ित का पक्ष ठीक से सुने आनन-फानन में वहां से रवाना हो गए। जांच अधिकारी का यह रवैया साफ दर्शाता है कि बैंक प्रशासन जमीनी हकीकत और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को दबाने का प्रयास कर रहा है।
स्थानीय सूत्रों और शिकायतकर्ता के अनुसार, उक्त शाखा प्रबंधक का यह रवैया अन्य ग्राहकों के साथ भी अक्सर देखने को मिलता है। अब देखना यह होगा कि वित्त मंत्रालय और इंडियन बैंक का शीर्ष प्रबंधन अपने इस ‘बेलगाम’ अधिकारी पर क्या और कितनी जल्दी एक्शन लेता है।
पहले भी दबी रह गईं शिकायतें; अब LDM की जांच पर खड़े हुए सवाल
ग्राउंड से मिल रही पुख्ता जानकारियों के मुताबिक, उक्त शाखा प्रबंधक के खिलाफ पहले भी कई उपभोक्ताओं द्वारा दुर्व्यवहार की शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। परंतु, हर बार विभागीय स्तर पर उचित दंडात्मक कार्रवाई न होने के कारण ही संबंधित अधिकारी के हौसले इतने बुलंद हुए कि वे खुद को नियम-कानूनों से ऊपर समझने लगे।
इस सिलसिले में जब ताजा शिकायत के बाद अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) सोनभद्र जांच के लिए सलखन शाखा पहुंचे, तो वहां भी प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी देखने को मिली। पीड़ित व्यवसायी ने जब साक्ष्य और निष्पक्षता के तौर पर कैमरे के सामने अपना आधिकारिक बयान दर्ज कराने का आग्रह किया, तो LDM ने वीडियो रिकॉर्डिंग के सामने बयान लेने से साफ मना कर दिया और एकतरफा रुख अपनाते हुए वहां से चले गए।
सिस्टम पर बड़ा सवालिया निशान
एक तरफ देश के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्रालय ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘ग्राहक-अनुकूल बैंकिंग’ का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सोनभद्र में ग्राहकों को अपनी ही जमा पूंजी के प्रबंधन (इंटरनेट बैंकिंग) के लिए अपमान झेलना पड़ रहा है। पहले शिकायतों को दबाना और अब LDM जैसी जिम्मेदारी वाली पोस्ट पर बैठे अधिकारी का कैमरे के सामने बयान दर्ज करने से भागना, इंडियन बैंक की साख और उसकी शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System) पर एक बहुत बड़ा धब्बा है।
