प्रताप नगर में स्कॉर्पियो से कुचलकर मारी गई थीं नीरज शर्मा; अनुकंपा नौकरी और करोड़ों की संपत्ति के लालच में कलयुगी बेटी आयुषी ने ताऊ और चचेरे भाई के साथ मिलकर रची खूनी साजिश।
जयपुर (indianationlive.com): राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक ऐसा रूह कंपा देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और भरोसे को तार-तार कर दिया है। करोड़ों की संपत्ति हड़पने और अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी पाने के लालच में एक 23 वर्षीय कलयुगी बेटी ने अपनी ही सगी मां की भाड़े के हत्यारों से बेरहमी से हत्या करवा दी। इस पूरे हत्याकांड में अब एक और बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपी बेटी अपने ही सगे चचेरे भाई के साथ पिछले एक साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी।
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस खूनी खेल का पर्दाफाश कर मृतका की बेटी आयुषी, उसके ताऊ सहित 7 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता चचेरा भाई फिलहाल पुलिस की पकड़ से दूर है।
रोड एक्सीडेंट नहीं, ‘सुपारी किलिंग’ का था खौफनाक जाल
गौरतलब है कि बीते 4 जुलाई की शाम को जयपुर के प्रताप नगर इलाके में एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो कार ने 45 वर्षीय नीरज शर्मा को बेरहमी से कुचल दिया था, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। शुरुआत में यह मामला एक आम सड़क हादसे जैसा नजर आ रहा था। लेकिन वारदात के बाद मृतका के भाई राकेश शर्मा को इस दुर्घटना पर गहरा संदेह हुआ और उन्होंने हत्या की आशंका जताते हुए FIR दर्ज कराई।
एसीपी (ACP) हरिशंकर शर्मा के निर्देशन में जब पुलिस ने मामले की बारीकी से तफ्तीश शुरू की, तो परत-दर-परत सच सामने आने लगा। पुलिस जांच में साफ हो गया कि यह कोई साधारण एक्सीडेंट नहीं, बल्कि ₹7 लाख की भारी-भरकम सुपारी देकर सोची-समझी रणनीति के तहत अंजाम दिया गया मर्डर था।
चचेरे भाई के साथ लिव-इन और अवैध संबंधों का घिनौना खेल
इस पूरे हत्याकांड में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मृतका के परिवार के वकील चंद्रप्रकाश ने एक हैरान करने वाला दावा किया। वकील के मुताबिक, 23 साल की मुख्य आरोपी आयुषी शर्मा पिछले एक साल से अपने सगे ताऊ मोहन स्वरूप के बेटे बलराम उर्फ रवि के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। दोनों के बीच अवैध संबंध होने का भी गहरा शक है। आयुषी अपनी विधवा मां और दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी को बेसहारा छोड़ बलराम के साथ रहने चली गई थी।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, आयुषी पहले पढ़ाई-लिखाई में काफी होशियार थी और अपने माता-पिता का बहुत ख्याल रखती थी। लेकिन जब से वह अपने चचेरे भाई बलराम के संपर्क में आई, उसके दिमाग पर ऐसा फितूर सवार हुआ कि उसका व्यवहार पूरी तरह बदल गया और वह अपनी मां से बात-बात पर हिंसक झगड़ा करने लगी थी।
जिस चाचा ने पाल-पोसकर बनाया वकील, उसी के परिवार को कर दिया खत्म
इस दर्दनाक दास्तान का सबसे काला अध्याय यह है कि जिस चाचा ने मुख्य आरोपी बलराम को अपने बेटे की तरह पाला, उसने ही पूरे परिवार को उजाड़ दिया। मृतका नीरज शर्मा के दिवंगत पति विजय शर्मा राजस्थान हाईकोर्ट में कोर्ट मास्टर के पद पर तैनात थे। उन्होंने अपने छोटे भाई के बेटे बलराम को जयपुर में अपने साथ रखा, उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया और उसे LLB (वकालत) करवाई।
लेकिन वकालत की डिग्री लेने के बाद भी बेरोजगार बलराम काम करने के बजाय अपने चाचा की संपत्ति पर नजर गड़ाए बैठा था। आरोप है कि संपत्ति के इसी लालच में बलराम ने पहले अपने चाचा विजय शर्मा की संदिग्ध मौत का ताना-बाना बुना और उनकी मौत के बाद चाची नीरज शर्मा को भी रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया। इस पूरे घिनौने खेल में उसने अपनी ही चचेरी बहन आयुषी को प्यार के जाल में फंसाकर मोहरा बना लिया।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 7 आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश तेज
प्रताप नगर थाना पुलिस ने इस वीभत्स हत्याकांड पर त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्यारी बेटी आयुषी शर्मा और उसके ताऊ मोहन स्वरूप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, घटना को अंजाम देने वाले सुपारी किलर्स फिलहाल पुलिस रिमांड पर हैं, जिनसे इस पूरे सिंडिकेट को लेकर कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस की कई विशेष टीमें मुख्य मास्टरमाइंड और फरार चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
